Breaking News
कांग्रेस ने देश को घोटालों के अलावा कुछ नहीं दिया- महाराज
कांग्रेस ने देश को घोटालों के अलावा कुछ नहीं दिया- महाराज
आईपीएल 2024- क्वालीफायर-1 में आज कोलकाता नाइट राइडर्स से भिड़ेगी सनराइजर्स हैदराबाद
आईपीएल 2024- क्वालीफायर-1 में आज कोलकाता नाइट राइडर्स से भिड़ेगी सनराइजर्स हैदराबाद
यहां जानें ईरानी राष्ट्रपति की मौत के बाद अब ईरान में कब होंगे राष्ट्रपति चुनाव?
यहां जानें ईरानी राष्ट्रपति की मौत के बाद अब ईरान में कब होंगे राष्ट्रपति चुनाव?
कार्तिक आर्यन की फिल्म चंदू चैंपियन का दमदार ट्रेलर रिलीज, देशभक्ति से भरपूर होगी फिल्म
कार्तिक आर्यन की फिल्म चंदू चैंपियन का दमदार ट्रेलर रिलीज, देशभक्ति से भरपूर होगी फिल्म
 धरना-प्रदर्शन के बाद केदारनाथ में गर्भगृह से दर्शन हुए शुरू
 धरना-प्रदर्शन के बाद केदारनाथ में गर्भगृह से दर्शन हुए शुरू
ईडी ने अब आम आदमी पार्टी पर लगाया ये बड़ा आरोप, गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट
ईडी ने अब आम आदमी पार्टी पर लगाया ये बड़ा आरोप, गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट
सीएम धामी के गुड गवर्नेंस का दिखा कमाल, मंहगाई पर नियंत्रण पाने में दिख रहे सफल
सीएम धामी के गुड गवर्नेंस का दिखा कमाल, मंहगाई पर नियंत्रण पाने में दिख रहे सफल
ब्लैकबेरी बनाम ब्लूबेरी- इनमें से कौन- सी है ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक ?
ब्लैकबेरी बनाम ब्लूबेरी- इनमें से कौन- सी है ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक ?
Auto Draft
शाम पांच बजे के बाद यमुनोत्री पैदल मार्ग रहेगा प्रतिबंधित, उत्तरकाशी पुलिस ने जारी की एसओपी 

गेहूं का उत्पादन कम होने से गहरा सकता है खाद्य संकट! निजी कंपनियों ने की तेजी से खरीदारी

गेहूं का उत्पादन कम होने से गहरा सकता है खाद्य संकट! निजी कंपनियों ने की तेजी से खरीदारी

[ad_1]

नई दिल्ली। गेहूं उत्पादन में गिरावट और निर्यात में वृद्धि के कारण मौजूदा वर्ष के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को संशोधित कर 195 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 444 लाख टन था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरकारी एजेंसियों द्वारा गेहूं की खरीद कम रही। विपणन वर्ष 2022-23 में सरकार की गेहूं खरीद घटकर 96 लाख टन रह गई, जबकि एक साल पहले यह 132 लाख टन रही थी। इसी तरह हरियाणा में गेहूं की खरीद 84 लाख टन से घटकर 40 लाख टन रह गई, जबकि मध्य प्रदेश में इसी अवधि के दौरान खरीद पहले के 118 लाख टन से घटकर 42 लाख टन रह गई।

सरकार की गेहूं खरीद इस साल पिछले वित्तवर्ष की तुलना में अब तक 53 प्रतिशत घटकर 182 लाख टन रह गई है। इसका मुख्य कारण निर्यात के लिए निजी कारोबारियों द्वारा गेहूं की तेजी से खरीदारी करना है। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। रबी विपणन वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है लेकिन अधिकांश खरीद जून तक समाप्त हो जाती है। पिछले विपणन वर्ष में अबतक की सर्वाधिक 433.44 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकारी उपक्रम भारतीय खाद्य निगम और राज्य की खरीद एजेंसियां ​​​​न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इस अनाज की खरीद करती हैं।

निजी कंपनियों ने की तेजी से खरीदारी
उत्तर प्रदेश में विपणन वर्ष 2022-23 में गेहूं की खरीद तेज गिरावट के साथ 2.64 लाख टन रह गई, जो एक साल पहले की अवधि में 33 लाख टन रही थी। सूत्रों ने कहा कि राजस्थान के मामले में इसी अवधि में 16 लाख टन की तुलना में खरीद सिर्फ 1,010 टन की हुई। सूत्रों ने सरकार की खरीद में तेज गिरावट का की वजह निर्यात करने के लिए निजी कंपनियों द्वारा की गई आक्रामक खरीदारी को बताया। सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) में गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 10 करोड़ 95.9 लाख टन से घटकर 10 करोड़ 64.1 लाख टन रहने अनुमान है।



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top